अम्मा के हाथों बना शहर
अम्मा सर पर काम का, पीठ पर खुशियों का भार लादे,
निरंतर झुकती, उठती, मुस्कराती, डरती…
अम्मा सर पर काम का, पीठ पर खुशियों का भार लादे,
निरंतर झुकती, उठती, मुस्कराती, डरती…
थप्पड़ से डर नहीं लगता, साहब… टमाटर के बढ़ते दाम से लगता है! हमें पूरी तरह एहसास है कि यह कार्टून आज के समय के हिसाब से शायद उतना सटीक न लगे, क्योंकि जब इसे बनाया गया था, तब टमाटर के दाम आसमान छू रहे थे। लेकिन जब आप इसे देख रहे होंगे, तब संभव